श्री गोरखनाथ पीठ के बारे मे

हिंदू योगी वाहिनी को हरियाणा सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 2012 के तहत वर्ष 2020 में हरियाणा राज्य के करनाल जिले मे पंजीकृत किया गया है जो की श्री गोरखनाथ पीठ, करनाल द्वारा संचालित है। श्री गोरखनाथ पीठ हरियाणा के करनाल जिले के सुल्तानपुर गाँव मे स्थित है। श्री गोरखनाथ पीठ के वर्तमान महंत श्री बाबा योगी रघुनाथ जी है। बसंत पंचमी के अवसर पर यहाँ विशाल मेला लगता है जिसमे विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जो श्री गोरखनाथ महोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है। हिंदू धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के अंतर्गत विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतरों में नाथ संप्रदाय का प्रमुख स्थान है नाथ संप्रदाय की मान्यता के अनुसार सच्चिदानंद शिव के साक्षात स्वरूप श्री गोरखनाथ जी सतयुग में पेशावर (पंजाब), त्रेता युग में गोरखपुर (उत्तरप्रदेश) द्वापर मे हरभुज, द्वारिका के पास गोरखमंघी सौराष्ट्र में तथा कलयुग में सुल्तानपुर जिला करनाल हरियाणा में अविर्भूत हुए थे। चारों युग में विद्यमान एक अयोनिज अमर महायोगी सिद्ध महापुरुष के रूप में एशिया के विशाल भूखंड तिब्बत, मंगोलिया, कंधार अफगानिस्तान, नेपाल, सिंघल तथा संपूर्ण भारतवर्ष को अपने योग से कृतार्थ किया। नाथ समाज और नाथ संप्रदाय का सनातन के अनुसार एक प्राचीन इतिहास रहा है जिसका कहीं भी बहुत कम उल्लेख किया गया है क्योंकि वैष्णव ब्राह्मणों ने नाथों के इतिहास को लोगों से छुपाया है। नाथ संप्रदाय के लोग सिद्ध महापुरुष और वीर होते थे। परम तपस्वी ज्ञानी, काल का भी रुख मोड़ देने वाले ऐसे तपस्वी होते थे। वह अपने मुख से जो वचन कह देते थे वह सत्य बन जाते थे। इतना तेज उनकी वाणी में होता था जब राजा महाराजाओं के पास सत्ता नहीं होती थी तो वे नाथ योगियों की शरण में ही जाते थे।
श्री गोरखनाथ पीठ का निर्माण
श्री गोरखनाथ पीठ सुल्तानपुर करनाल हरियाणा में अनवरत योग साधना का क्रम प्राचीन काल से चला आ रहा है। ज्वाला देवी के स्थान पर परिभ्रमण के लिए जाते हुए श्री गोरखनाथ जी ने यहां आकर भगवती सरस्वती के तटवर्ती क्षेत्र में तपस्या की थी और इसी स्थान पर अपनी दिव्य समाधि लगाई थी। जहां वर्तमान में श्री गोरखनाथ पीठ स्थापित है। नाथ योगी संप्रदाय के महान प्रवर्तक श्री गोरखनाथ जी ने अपने अलौकिक आध्यात्मिक गरिमा से इस स्थान को पवित्र किया था योगेश्वर श्री गोरखनाथ जी के पुण्य स्थल के कारण इस स्थान का नाम श्री गोरखनाथ पीठ पड़ा। महायोगी गुरु गोरखनाथ जी की यह तपस्या भूमि प्रारंभ में एक तपोवन के रूप में थी। माना जाता है कि लोक कल्याण के लिए बाबा गोरखनाथ जी ने “शाबर मंत्र” का निर्माण इसी स्थान पर किया था। जिससे कलयुग में तंत्र सीधी तथा तंत्र ज्ञान की उत्पत्ति हुई। बाबा औगड़नाथ जी की भी यह तपोभूमि रही है। अनेकों ऋषि सन्यासियों ने शाबर मंत्र से अपना जीवन सफल बनाया तथा मोक्ष प्राप्ति की है। इस पवित्र स्थान को नष्ट करने के भरपूर प्रयास किए गए। अनेकों विपत्तियों के कारण नाथ योगियों द्वारा इस पवित्र पीठ की पूजा-अर्चना तथा संभाल की जाती रही है।
दिव्य शंख
श्री गोरखनाथ पीठ में एक दिव्य शंख स्थापित है। यह दिव्य शंख बाबा गोरखनाथ जी ने अपने शिष्य औगड़नाथ जी को दिया था और बाबा औगड़नाथ जी ने यह दिव्य शंख अपने शिष्य बाबा कूड़ा नाथ जी को दिया था। अनेकों नाथ योगियों ने इस दिव्य शंख की पूजा अर्चना की तथा इस अमूल्य धरोहर को संभाल कर रखा है। वर्तमान में इस दिव्य शंख की बाबा योगी रघुनाथ जी द्वारा पूजा अर्चना तथा संभाल की जा रही है इस दिव्य शंख के दर्शन मात्र से हमारे चारों ओर दैविक शक्तियों का एक सुरक्षा चक्र निर्मित हो जाता है जिससे मानव के सभी पाप तथा कष्ट मिट जाते हैं तथा व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि पाने के लिए एक बार दर्शन अवश्य करें।
अखंड धुना
अखंड धुना श्री गोरखनाथ पीठ में विशेष प्रेरणा स्त्रोत का कार्य करता है। इसमें बाबा गोरखनाथ जी द्वारा प्रज्वलित अग्नि आज भी विद्यमान है। इस पवित्र धुने की भभूत से असाध्य रोगों में भी चमत्कारी लाभ होते हैं। श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए बाबा गोरखनाथ जी के धुने की भभूत ले जाते हैं।
श्री गोरखनाथ महोत्सव मेला
प्रतिदिन श्री गोरखनाथ पीठ में भारत के सुदूर प्रांतों से आए पर्यटकों, यात्रियों और स्थानीय आस-पड़ोस के असंख्य श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए आती है। रविवार को यहां दर्शनार्थियों की संख्या अधिक होती है। बसंत पंचमी के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है जो कि श्री गोरखनाथ महोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है
पीठ के महंत
श्री गोरखनाथ जी के प्रतिनिधि के रूप में सम्मानित संत को महंत की उपाधि से विभूषित किया जाता है। इस पीठ के प्रथम महंत बाबा औगड़नाथ जी कहे जाते हैं जो बाबा गोरखनाथ जी के शिष्य थे। तत्पश्चात बाबा कूड़ा नाथ जी एवं पीठ का जीर्णोंद्वार करने वालों में प्रमुख बाबा शिव नाथ जी थे। बाबा सादी नाथ जी, बाबा शंकर नाथ जी बाबा राम नाथ जी, बाबा चितर नाथ जी, बाबा गुलाब नाथ जी, बाबा बालक नाथ जी, बाबा कालु नाथ जी, बाबा साहिब नाथ जी तथा वर्तमान में बाबा योगी रघुनाथ जी पीठ के महंत है। योगी रघुनाथ जी व्यवहार, कुशल, दृढ़ता, कर्मठा, वाक्य पटुता के आदर्श मार्गों का अनुसरण करते हुए सनातन हिंदुत्व के प्रति पूर्ण समर्पित है। योगी रघुनाथ जी ने हिंदू योगी वाहिनी का गठन किया जो हिंदू युवाओं को हिंदुनिष्ट बनने की प्रेरणा देते हैं। पीठ के रिकॉर्ड से पता चलता है कि श्री गोरखनाथ पीठ का आकार समय की अवधि के साथ तब्दील हो गया था। वास्तव में सल्तनत और मुगल काल के शासकों के द्वारा इस पीठ को नष्ट करने के भरपूर प्रयास किए गए। पहले वैष्णव ब्राह्मणों द्वारा श्री गोरखनाथ पीठ को नष्ट कर दिया गया था और बाद में इस्लामी शासकों द्वारा नष्ट किया गया था। इसके बावजूद भी यह जगह अभी भी अपनी पवित्रता के लिए उसके महत्व और पवित्र आभा रखती है।

!! जय बाबा गुरु गोरखनाथ जी !!